Author Article: Meenakshi Singh

Hello author, on behalf of all the readers, we would like to discuss something about you and of course, your book as well.  This conversation will help reader to know more about you and your debut book.

Criticspace: Most welcome to Criticspcae, Author. We heartily congratulate you for being a published author. It’s really a great achievement. First thing, we would like to know about your basic info as a person, daily life, career so far and anything you would like to share about you with your readers.

Author: मैं एक बेहद सामान्य सी नारी हूं, जिसकी पहली प्राथमिकता उसका परिवार है। कुछ साल पहले मुझे एक सरकारी नौकरी मिली थी, जिसे मैंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण करना मुनासिब नहीं समझा। अभी मेरे बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए फिलहाल पहली प्राथमिकता बच्चे हैं। उसके बाद जो थोड़ा-बहुत समय बचा पाती हूं, उसमें  परिवारिक बिजनेस में पति की सहायता करती हूं।  

Criticspace: That’s really great; please tell us something about your journey of becoming an author. When you actually started writing and how was the circumstance? Did any person or situation influenced you to write your debut book or was it your childhood hobby of writing?

Author: मैंने 16 साल की उम्र में लिखना शुरू किया था । उस वक्त सामयिक विषयों पर लिखा करती थी, जैसे : बिहार विभाजन होना चाहिए या नहीं, शिक्षा का स्वरूप क्या होना चाहिए ! इन विषयों पर लिख कर अखबार में भेजा करती थी । तस्वीर के साथ छपी अभिव्यक्ति मेरे किशोर मन को काफी खुशी देती थी। किशोरावस्था का शौक बाद में जिंदगी की जिम्मेदारियों के बीच थम सा गया, परंतु बीच-बीच में कुछ समय निकालकर मैं गृहशोभा, मेरी सहेली, गृहलक्ष्मी, फोर्थ डाइमेंशन की एक मैगजीन संगिनी एवं विचार सारांश में यदा – कदा लेख लिखा करती थी। कहानी और कविता लिखा तो था मैंने पर बहुत कम, फिर सोशल मीडिया में फेसबुक रूपी मंच मेरे लिए पार्ट टाइम कार्यस्थली बन गया। बचपन का वो शौक फिर से पूरा करने का मौका मुझे फेसबुक के द्वारा मिला। जहां पर मेरे दोस्तों से मिलती प्रतिक्रिया ने हमेशा मेरा उत्साह बढ़ाया। उनके उत्साहवर्धन और बचपन के शौक के प्रतिक्रियास्वरूप “बस तुम्हारे लिये” का लाना संभव हो सका। 

Criticspace: Please tell the reader something about your book. What is your message to those readers who have still not read the book? Why they should pick it up for reading?

Author: “बस तुम्हारे लिये” एक ऐसी किताब है, जिसमें जिंदगी में रूबरू होते हर भाव को समाहित करने की कोशिश की गई है । इस किताब के अंतर्गत पाठक-लेखक संवाद सी स्थिति बनाई गई है, इस चाहत के साथ कि मेरे पाठक दोस्तों को लेखक मन को समझने में सहायता मिल सके और वे रचना को अच्छी तरह से आत्मसात कर पाएं। इसके अंतर्गत प्यार, चुभती हकीकत, टीसता दर्द, रीते लम्हों की कसक और सकारात्मक सोच के साथ जीवन को जीने की कोशिश के साथ वृद्धाश्रम का दंश.. तकरीबन हर विषय को समेटा गया है। मुझे लगता है, हर पाठक इसके अंदर खुद को कहीं न कहीं पाएंगे। कल्पना और हकीकत का खूबसूरत ताना-बाना है “बस तुम्हारे लिये” , जिसे हर किसी को जरूर पढ़ना चाहिए।

Criticspace: And yes, the most important thing we would like to hear from you is what is your message to those new writers who have not yet started their journey of becoming an author? You have been their source of motivation, please convey your thoughts with them.

Author: नये लेखकों से मैं कहना चाहूंगी कि वे लिखने के साथ साथ पढ़ने की आदत भी बनाए रखें। इससे आपके लेखनी में परिपक्वता आएगी, छपने की जल्दीबाजी बिल्कुल भी मत करें। आपके इसी जल्दीबाजी का फायदा उठाया जा सकता है। आप यह कभी नहीं सोचे कि मैं अब लेखक बन गया हूं तो पढ़ना मेरी जरूरत नहीं है। मुझे लगता है कि एक लिखने के लिए दस पढ़ने की जरूरत है। दिल से कोशिश कीजिए, सफलता आपके कदमों को जरूर चूमेगी।

Criticspace: That’s really great! We wish you all good luck for your literature career.

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